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स्कूल ड्रॉपआउट बुजुर्ग ने बना दी सोलर कार; किया हजारों किलोमीटर का सफर

 

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आपने ये तो सुना होगा कि कुछ करने की चाह हो तो उम्र कभी उस चाह के बीच पत्थर नहीं बनता। कुछ नया व बड़ा काम करने के लिए केवल लगन व हुनर ही काफी है। तो चलिए आपको एक ऐसे ही उदाहरण से रूबरू कराते है व एक ऐसे व्यक्ति के कारनाम के बारे में बताते है जिसने अपनी उम्र की परवाह ना करते हुए देश में एक मिसला कायम की।

63 साल के सैय्यद सज्जन अहमद बेंगलूरू से करीब 70 किलोमीटर दूर कोलार में रहने वाले है। सैय्यद सज्जन ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिससे हर कोई यह मान गया है कि हुनर हो तो व्यक्ति किसी भी उम्र में खुद को साबित कर सकता है।

सैय्यद ने एक सोलर बनाया,जिससे की उन्होंने हजारों किलोमीटर का सफर तय किया। इतना ही नहीं वह दिल्ली में आयोजित हुए पहले इन्डिया इन्टरनेशनल साइन्स फेयर में हिस्सा लिया। साथ ही वह अपने सोलर कार से बेंगलूरू से दिल्ली पहुंचे।

सैय्यद को तीन हजार किलोमीटर की दूरी का सफर तय करने में 30 दिन का समय लगा। उनके स्कूली पढ़ाई की बात करे तो गरीबी के कारण वह अपनी पढ़ाई पुरी नहीं कर पाए।

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सैय्यद ने 12वीं तक पढ़ाई की है, अपने करियर की शरुआत फल बेचकर की।सैय्यद आज इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स एसेम्बल करने का काम करते हैं। इससे पहले वह टेप, रेडियो, ठीक करने का काम करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने कम्पूटरों को भी ठीक करने का काम किया। यह सब काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि कुछ नया करना चाहिए।

2002 की शुरूआत में सैय्यद ने जब सोलर कार बनाने की ठानी, तब सैय्याद की उम्र 50 वर्ष थी। सैय्यद ने एक सोलर कार बनाने की ठानी, जो पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए अपना काम कर सके।उन्होंने अपने काम की शुरूआत दोपहिया गाड़ी को मॉडीफाई कर इसे इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील करते हुए की। बाद में उन्होंने तीन पहिया व चार पहिए इसे तबदील किया।

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अपने हुनर को एक नया मुकाम देने के लिए सैय्यद को अपने काम की वजह से कई अवार्ड्स से नवाज़ा गया। विज्ञान व पर्यावरण के क्षेत्र में कर्णाटक सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 2006 में एक अवार्ड दिया गया।4 से 8 दिसम्बर तक चलने वाले दिल्ली आईआईटी के प्रोग्राम में साइन्स फेयर में सैय्यद अहमद ने अपनी कार का प्रदर्शन किया, जिसमें पांच सोलर पैनल लगे हुए हैं।प्रत्येक पैनल की क्षमता 100 वाट है। इन पैनल से 12 वोल्ट के 6 बैटरी के सेट उर्जा से संचालित होते हैं, जिनसे कार को रफ्तार मिलती है।

सैय्यद अहमद के इस बेहतरीन हुनर के लिए कनार्टक सरकार की तरफ से स्वर्गीय राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल अहमद की याद में स्थापित पर्यावरण सरक्षंण की तरफ से उन्हें सम्मानित किया गया।आपको पता है कि सैय्यद ने जिस सोलर कार को कड़ी मेहनत से बनाया है उनकी कीमत क्या है? इस वाहन की कीमत करीब 1 लाख रुपए है, अपने अभी तक के यादगार सफर के बाद अब सैय्यद दिल्ली से डॉ.कलाम रामेश्वर के सफर के लिए निकलने वाले है।

 

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